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Thursday, 18 January 2018

भारत में गणतंत्र दिवस मानाने के अनेक तरीके


पूरे भारत मे कई लोग गणतंत्र दिवस का जश्न मनाते है। जो कि एक राष्ट्रीय छुट्टी है। यह एक ऐसा दिन है, जिसे कभी नही भुला जा सकता, यही वो दिन है जब भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। यह स्वतन्त्र भारत की ओर एक बड़ा कदम था।

 लोग क्या करते है ?


भारत मे होने वाले गणतंत्र दिवस वाले कार्यक्रमो और समारोहों के आयोजन में काफी प्रयास किया जाता है। बड़े सैनिको की परेड नई दिल्ली व राज्यो की राजधानियों में की जाती है। भारतीय सेना के प्रतिनिधियो, नोसेना और वायु सेना ओर पारम्परिक नृत्य मण्डल परेड में भाग लेते हैं। नई दिल्ली में एक भव्य परेड निकलती है और भारत के प्रधानमंत्री से इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर पुष्पहार होता है, और उन जवानों को याद किया जाता है जिन्होंने देश को बचाने के लिए अपनी जान करबान करी। परेड के दौरान भारत के राष्ट्रीपति सेना द्वारा सलाम लेते है, जबकि सभी राज्यपाल अपनी राज्य की सेना द्वारा सलाम लेते है। विदेश मंत्री इस कार्यक्रम के मुख्य अथिति होते है।

Picture by "The Wanderer's Eye Photography"

 पुरुस्कार ओर बहादुरी के पदक सेना के जवानों व आम जनता को दिए जाते है। सशस्त्र बल हेलीकॉप्टरों द्वारा दर्शको पर गुलाब की पंखुड़ियों की बरसात कर देते है। स्कूली बच्चे भी नाच कर व देशभक्ति गीत का कर परेड में हिस्सा लेते है। सशस्त्रबल भी मोटरसाइकिल पर अपनी प्रतिभा का नमूना देते है। फिर लड़ाकू विमान अपने शाहिद साथियो को श्रद्धांजलि के रूप में एक ऐतीहसिक हवाई प्रदर्शन करके दिखाते है, ओर प्रदर्शन के अंत में वे अपने विमान के निकलने वाले धुंए से भारतीय तिरंगा बनाते है।

इसने भारत के इतिहास व संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमो का आयोजन किया जाता है, बच्चो का कार्यक्रम में एक खास स्थान होता है। कई बच्चो को उपहार में मिठाई व खिलोनो भी मिलते है। साल के इस समय मे प्रधानमंत्री की रैली भी निकलती है, और साथ ही लोकतंत्र - नेशनल फोक डांस कॉम्पिटिशन भी, जोकि सालाना 24 से 29 जनवरी तक होता है।

 सार्वजनिक जीवन

गणतंत्र दिवस एक राजपत्रित छुट्टी है जोकि हर साल 26 जनवरी को होती है। इस दिन सभी राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय सभी सरकारी दफ्तर, बैंक व डाकघर बन्द होते है, दुकानों, व्यवसायो व संगठनों को बंद किया जा सकता है या उन्हें कार्ये के घण्टे कम किये जा सकते है।

 सार्वजनिक यातायात पर इसका ज्यादा प्रभाव नही पड़ता, हालांकि राजधानीयो में गणतंत्र दिवस की परेड से काफी ट्रैफिक हो जाता है, परेड की वजह से कई रास्ते बंद और कई मोड़ने पड़ते है। इस दिन सुरक्षा का खास ख्याल रखा जाता है, ख़ासकर नई दिल्ली में।

 इतिहास


जब 15 अगस्त 1947 को भारत यूनाइटेड किंगडम से आजाद हुआ तो उस समय भारत के पास कोई स्थायी संविधान नही था। भरत की समिति ने 4 नवम्बर 1947 को राष्ट्रीय असेंबली में संविधान का पहला प्रारूप दिखाया। राष्ट्रीय असेंबली ने 24 जनवरी 1950 को एक अंग्रेजी और एक हिंदी भाषा के अंतिम संविधान के संस्करण पे हस्ताक्षर किए।
 भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया, यह दिन इसलिए चुना गया था क्योंकि इस दिन "पूर्ण स्वराज दिन" की सलगिरा थी, जोकि 26 जनवरी 1930 को हुआ था। संविधान ने भारत के निवासियों को अपनी सरकार खुद चुनने का अधिकार दिया, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में भारत के पहले राष्ट्रपति के तौर पर शपत ली, उसके बाद वे इर्विन स्टेडियम गए जहाँ उन्होंने भारत का झंडा फैराय। जब से ये एतिहासिक दिन 26 जनवरी (गनतंत्र दिवस ) मनाया जाता है।


 बीटिंग रिट्रीट 


बीटिंग रीट्रीट गणतंत्र दिवस के समाप्त होने के बाद होती है, यह 26 जनवरी की शाम हो कि जाति है, गणतंत्र दिवस के बाद तीसरा दिन, यह तीन दलो के बैंड द्वारा प्रदर्शित किया
जाता है, भारतीय सेना, भारतीय नोसेना ओर भारतीय वायुसेना। यह राजपथ के पास मे राष्ट्रपति भवन के उत्तरी व दक्षिणी भाग में होता है। भारतीय राष्ट्रपति इस कार्यक्रम के खास महमान होते है, जोकि घुड़सवारों की एक टुकड़ी के साथ गाड़ी म आते है, फिर राष्ट्रीय गान शुरू होजाता है और इसी के साथ  सेना के बैंड, पाइप और ड्रम बैंड भी शुरू हो जाते है।

 प्रतीक


गणतन्त्र दिवस आज़ाद भारत की असली छवि दिखाता है। सेना की परेड, सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन ओर राष्ट्रीय ध्वज इस दिन के महत्वपूर्ण प्रतीक है। भारतीय ध्वज तीन आड़ी पट्टियों से मिलकर बना है सबसे ऊपर केसरिया बीच मे सफेद और नीचे हरा तीनो बराबरी लम्बाई व चौड़ाई के। झण्डे की लंबाई चौड़ाई का अनुपात 2:1 है। बीच मे नीले रंग का पहिया बना है जिसमे सफेद डांडिया है जो अशोक चक्र कहलाता है, इसमे 24 धारिया होती है।

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